Skip to content

Suno Bandhu

  • About
  • Blog
  • Contact
Suno Bandhu
Blog

पापा-मम्मी की 50 वीं सालगिरह पर मेरी तरफ से भेंट

मैं कई दिनों से सोच रही थी कि आज के इस शुभ अवसर पर मुझे भी अपने मम्मी-पापा को कोई Gift देना चाहिए, लेकिन मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। उन्होंने मुझे यह जीवन और इस जीवन में इतना सारा प्यार दिया है कि मेरी इतनी हैसियत ही नहीं है कि मैं उन्हें कुछ दे सकूँ, या उनके द्वारा दिए गए प्यार और दुलार का ऋण चुका सकूँ।

आज की इस भाग दौड़ की जिंदगी में मैं उनके लिए वक्त नहीं निकाल पाती और उन्हें भी लगता होगा कि मैं उन्हें याद नहीं करती, लेकिन ऐसा नहीं हैं कि उनके साथ बिताए गए हर पल आज भी मेरे दिल की गहराइयों में बसे हुए है। हाँ कुछ यादें एकदम स्पष्ट तो कुछ धुंधली सी!

आज मैं अपनी यादों के उन पलों को वापस अपने मम्मी-पापा के साथ जीना चाहती हूँ, हाँ उन धुंधली हुई यादों के कुछ पल थोड़े अलग भी हो सकते हैं लेकिन वो पल हैं…. मेरी यादों में मेरे और मम्मी-पापा के प्यार के।

तुम्हें और क्या दूं मैं दिल के सिवाय, तुमको हमारी उम्र लग जाये,

चलिए मेरे जन्म से चलते है, हमारे घर में Orient Company का एक पंखा था और अभी कुछ सालों पहले तक भी था, उसे दिखाते हुए पापा कहते थे कि यह पंखा वो मेरे लिए ही लाए थे।

मुझे समय अच्छी तरह से याद नहीं हैं, ये बात मेरे अस्पताल से घर आने वाले दिन की भी हो सकती है या हो सकता है कि कुछ दिनों बाद की हो।

तो हुआ यूं कि जब मैं मम्मी के साथ अपने घर आई तो उस रात मच्छरों ने काट-काट कर मुझे पूरा लाल कर दिया। बस अगले दिन की रात होने से पहले हमारे घर की छत पर एक पंखा लग चुका था।

➤ Read Next:  Innocence in a Bottle: Unveiling the 9 Best Baby Massage Oils

बचपन में एक बार मैं, पापा-मम्मी, दुर्गा और शायद गोदी में विशाल भी होगा मुझे ठीक से याद नहीं हैं। हम लोग टैक्सी से पुष्पा बुआ के घर जा रहे थे। दुर्गा छोटी ही थी ढाई या तीन साल की। हमें सिखाया गया था कि किसी के घर में जाते हैं तो चप्पल बाहर ही खोल कर जाते हैं। तो उसने भी टैक्सी में चढ़ने से पहले अपनी चप्पल बाहर ही खोल दी, आज्ञाकारी बेटी। टैक्सी चली और मेरी नजर उसके पाँव पर पड़ी, मैंने पापा से कहा, “पापा दुर्गा ने चप्पल सड़क पर ही उतार दी, मैं लेकर आती हूँ।“ पापा रोकते या कुछ कहते उससे पहले ही मैंने चलती टैक्सी से अपना पाँव बाहर निकाल दिया। मेरा पाँव टैक्सी के पहियें के नीचे आ गया, टैक्सी वाले ने जल्दी से ब्रेक लगाए लेकिन तब तक तो मेरा पाँव टैक्सी के साथ-साथ लगभग दो से तीन फीट तक घिसट चुका था, क्योंकि केवल मेरा पाँव ही तो टैक्सी के बाहर था मैं तो टैक्सी के अंदर थी। मेरे पैर में प्लास्टर चढ़ गया। लेकिन चाहे कुछ भी हो जाये मुझे तो बस स्कूल जाना था, तो मेरी जिद पर पापा रोज मुझे अपने कंधे पर बैठा कर स्कूल छोड़ते और लाते।

मुझे आज भी याद है बचपन में हर Sunday को मम्मी तो सुबह से ही हमारे कपड़े धोने लग जाया करती और पापा सबसे पहले हम सबके जूतों की पोलिश करते और फिर हम चारों को लाइन में बैठाकर हमारे नाखून काटते, हमारे नाखून इतने छोटे हो जाते कि हमसे दो दिन तक सब्जी में हाथ भी ना डाला जाता। बस फिर दो दिन तक सब्जी में बारीक चूरी हुई रोटी उनके हाथों से खाने का आनन्द उठाया जाता। आज सोचती हूँ कि दो दिन बाद ही नाखून सही क्यों हो जाते थे पूरे छः दिन तक जलन होती रहती तो कितना अच्छा होता।

➤ Read Next:  The Ultimate Playlist: Best Hindi Birthday Songs

मेहनत, ईमानदारी और हालातों का सामना करने का गुण मुझे मेरे मम्मी-पापा से ही मिला है।

हमारे गाँव रियाँ के रेलवे स्टेशन से हमारा घर लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर है। जब भी हम गर्मियों की छुट्टियों में अपने गाँव रियाँ जाते तो पापा चिलचिलाती धूप में अपने दोनों हाथों में कपड़ों से भरी दो पेटियाँ और दोनों कंधों पर दोनों भाईयों को बैठाकर पैदल ही रेलवे स्टेशन से घर तक आते, लेकिन उनके चेहरे पर किसी प्रकार की शिकन, गुस्से या थकान का नामों निशान भी नहीं होता।

एक वो गाना है ना, “पतझड़ सावन बसंत बहार,एक बरस के मौसम चार मौसम चार मौसम चार पाँचवाँ मौसम प्यार का इंतजार का…..

हमारे घर में ये पाँचों मौसम तो थे ही लेकिन एक छठा मौसम भी आता था, और वो था हमारी पिटाई का। पापा हमारी बड़ी से बड़ी शैतानी पर हमें कुछ भी नहीं कहते थे और ना ही डाँटते। लेकिन जिस दिन इस मौसम का आगमन होता। बस हममें से किसी एक की गलती और बस हम पांचों की जम कर पिटाई (जिसमें हजारी भी शामिल होता था।)।

एक बार हम पाँचों की पिटाई इस बात पर हुई थी कि घर से 50 रुपये का एक नोट चोरी हो गया था।

पापा को जब इस बात का पता चला तो एक बार कमरे में हम सबको बंद कर लिया और सबको एक ही रस्सी से बांध दिया, फिर शुरू हुई हमारी धुनाई। एक को जोर से चाँटा पड़ता और पाँचों गिरते।

ये तो याद नहीं है कि यह कांड किसने किया था, लेकिन जम कर हमारी पिटाई करने के बाद में पापा ने हमें समझाया कि बात 50 रुपये की नहीं, ईमानदारी की है। भई अब इतनी पिटाई खाने के बाद तो इसे भूला नहीं जा सकता, हैं ना।

➤ Read Next:  The Unending Musical Journey of Antakshari (अंताक्षरी ): A Timeless Game of Melodies

एक बार तो उन्होंने हम चारों को साइकिल से बांध दिया और जमकर धुनाई की।

जब भी बंद कमरे में हमारी पिटाई होती, मम्मी के तो बीच में आने का सवाल ही नहीं था और बाई यानि मेरी दादी दरवाजे के बाहर खड़ी-खड़ी पापा को गालियाँ देती रहती, बाईकावना छोड़ दे मार देवेलों काईं, डाकी है काईं, ज लेवेलों काईं टाबरा की। दरवाजा खुलवाने के लिए चिल्ला-चिल्ला कर घर में कोहराम मचा देती, लेकिन वो दरवाजा हमारी अच्छी तरह से धुनाई हो चुकने के बाद ही खुलता था।

लेकिन वो धुनाई हमें कुछ ही दिनों तक याद रहती थी, क्योंकि पापा के प्यार से हम उस धुनाई को जल्दी ही भूल जाते थे और हमारी शरारतों का सिलसिला फिर से शुरू हो जाता था। वैसे यह क्रम ज्यादा नहीं, बस कुछ सालों तक ही चला। मेरे 13-14 साल के होने के बाद मुझे याद नहीं कि पापा ने हम पर हाथ उठाया हो।

मुझे पता है कि हमारी पिटाई करने के बाद वे खुद कितना दुखी होते होंगे इसलिए हमें पहले से भी ज्यादा प्यार करते। तभी तो कुछ ही दिनों में हम अपनी पिटाई को भूल जाते थे और पापा के साथ खेलना खिलाना फिर से चालू हो जाता।

पापा कभी हमारे साथ पापा की तरह से बल्कि एक दोस्त की तरह रहे, साथ में खाना, साथ में खेलना, और साथ में गाने गाना। जी हाँ, वह भी उस जमाने में जब लोग गाना गाना बुरा मानते थे, पापा और मैं साथ में काम करते हुए फिल्मी गाने गाते थे। साथ में ताश, लूडो, चंगा-अष्टा पे खेलते।

मुझे आज भी याद है पापा का हमें लगभग हर Friday को movie दिखाने ले जाना, हर महीने VCR पर फिल्में दिखाना और वीडियो गेम खिलवाना, दीपावली के बाद अपने हाथों से गन्नों को छील कर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट-काट कर खिलाना, एक ही परात में तरबूज काट कर सबको साथ में खिलाना।

➤ Read Next:  9 Best Face Wash for Teenage Skin in India (in 2024)

मेरा Attachment मम्मी से ज्यादा पापा के साथ था। सुबह उठते ही सबसे पहले अखबार पढ़ने की लड़ाई, फिर दोनों मिलकर अखबार में आने वाली पहेलियाँ बुझते, क्रॉस वर्ड भरते।

मम्मी-पापा ने मुझ पर या दुर्गा पर लड़की होने के कारण कभी कोई रोक-टोक नहीं लगाई, काभई यह नहीं कहा कि तुम लड़कियाँ हो और तुम्हें ये काम नहीं करना चाहिए या तुम्हें केवल घर के काम ही करने चाहिए। कहीं आने-जाने पर रोक-टोक नहीं उन्हें हम पर पूरा विश्वास था और हमने उनके विश्वास को टूटने नहीं दिया।

कभी हम दोनों बहनों को काम करने के लिए ज्यादा डांट-डपट नहीं करते थे, बल्कि मम्मी तो कहती अभी तो खाने-खेलने दो शादी के बाद तो काम करना ही है, मैंने भी तो ससुराल में ही सीखा है।

दरअसल मेरी मम्मी भी अपने घर की लाड़ली थी, छः-छः भाभियाँ अपनी छोटी ननंद को कोई भी काम नहीं करने देती थी। इसलिए मम्मी को भी घर का काम ज्यादा नहीं आता था। लेकिन grasping पावर बहुत अच्छी थी। मुश्किल से 1 साल ही स्कूल गई होगी, लेकिन 20 तक पहाड़े, अक्षर ज्ञान यहाँ तक कि ABCD जो कि मम्मी ने खुद भी नहीं पढ़ी थी, वो भी मम्मी ने ही मुझे सिखाई थी। इसीलिए मम्मी घर के हर काम में भी जल्दी ही निपुण हो गई।

किस्से तो इतने हैं कि पूरी रात बीत जाएगी लेकिन मेरी मीठी यादें खत्म ही नहीं होंगी।

इसलिए अंत मैं मैं बस इतना ही कहना चाहूँगी कि मैं भगवान की बहुत शुक्रगुजार हूँ जो उन्होनें मुझे इतना प्यार करने वाले और दिल के इतने सच्चे मम्मी-पापा दिए।

शुक्रिया

Thank You for listening me

Post navigation

Previous Previous
How To Sidhda Ram Raksha Stotra – कैसे करें राम रक्षा स्तोत्र को सिद्ध
NextContinue
पापा-मम्मी की 50 वीं सालगिरह पर उनकी जीवनी संस्मरण

Recent Posts

  • पापा-मम्मी की 50 वीं सालगिरह पर उनकी जीवनी संस्मरण
  • पापा-मम्मी की 50 वीं सालगिरह पर मेरी तरफ से भेंट
  • How To Sidhda Ram Raksha Stotra – कैसे करें राम रक्षा स्तोत्र को सिद्ध
  • आखिरी वादा
  • फिल्म रिव्यू “मर्दानी-3” 2026: क्या रानी मुखर्जी फिर जीत पाईं दिल? जानें पूरा विश्लेषण“

Recent Comments

No comments to show.
  • About
  • Archive
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions

SunoBandhu.com is a participant in the Amazon Services LLC Associates Program, an affiliate advertising program designed to provide a means for sites to earn advertising fees by advertising and linking to Amazon.com. Additionally, SunoBandhu.com participates in various other affiliate programs, and we sometimes get a commission through purchases made through our links.

Suno Bandhu © 2026

  • About
  • Archive
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Suno Bandhu
  • Terms & Conditions
Facebook X Instagram
Search